ख़ामोशियों में तब्दील हो जाये कोई रिश्ता
उसे टूटने में देर नहीं लगती
अल्फ़ाज कम पड़ जायें गुफ्तगु करने के लिए, तो राहें बदलने में देर नहीं लगती
है ये आंच ऐसी कि धीरे-धीरे तबाह कर देती है घरौंदा, तो कोई जलने के बाद समझता है।।
Writer-Kalpana Chauhan
ख़ामोशियों में तब्दील हो जाये कोई रिश्ता
उसे टूटने में देर नहीं लगती
अल्फ़ाज कम पड़ जायें गुफ्तगु करने के लिए, तो राहें बदलने में देर नहीं लगती
है ये आंच ऐसी कि धीरे-धीरे तबाह कर देती है घरौंदा, तो कोई जलने के बाद समझता है।।
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