एक पहल अच्छाई की
अपना जहां तो रोशन करते हैं सभीचलो दूसरों के जहां को भी रोशन करें अपने लिए तो खरीदते हैं सब खुशियां चलो दूसरों के लिए [Read More]
अपना जहां तो रोशन करते हैं सभीचलो दूसरों के जहां को भी रोशन करें अपने लिए तो खरीदते हैं सब खुशियां चलो दूसरों के लिए [Read More]
मेरे मोहब्बत करने का ये अंजाम लिख देना तुम,अपनी तमाम मुश्किलात मेरे नाम लिख देना तुम।बहुत ज़ुल्म किया है तुम पे समाज और रिवाज़ ने,तुम्हारे [Read More]
वो बुढ़िया कल भी अकेली थी वो बुढ़िया अब भी अकेली है चेहरे की झुर्रियाँ पढ़ कर पता चलता हैउसने कितने सदियों की पीड़ा झेली [Read More]
जब किसी घर में चुल्हा न जले और परिवारभूखा ही सो जाए. जब किसी गांव में गरीब लोगों को भीख मांग कर पेट भरना पड़े…… [Read More]
ग़ज़ल ख़ुशी हासिल नहीं है अब ख़ुशी में , न जाने क्या हुआ है ज़िन्दगी में । बहुत कम उम्र आयी काम मेरे, ज़ियादातर गुज़ारी [Read More]
बड़े-बड़े कुछ लोग यहाँ, निर्धन को नोंच के खाते हैं। कर भण्डारे बड़े-बड़े फिर परोपकार बतलाते हैं। स्त्री जाति को नित ही जो, छींटाकशी करके [Read More]
किसी से प्रेम करने को तुम्हें कब मना किया है लेकिन!प्यार करना तुम ….. किसी से प्यार करना कहाँ गलत है….? बस….! इतना ध्यान रहे [Read More]
ग़ज़ल हमारे प्यार का परचम तेरे दिल पे नहीं फहरा जहाँ चाहा चमन हमने वहीं पे हो गया सहरा गला मैं फाड़ कर रोया सुना [Read More]
देश हित में समर्पित एक ग़ज़ल इंसानियत ज़िंदा रहे इंसानियत से प्यार हो क्यों नफरतों की आग से इंसानियत की हार हो स्वाधीनता का पर्व [Read More]
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